Sunday, May 3, 2015

आज का ये सुन्हेरा पल जी लेने दे मुझे

आज का ये सुन्हेरा पल जी लेने दे मुझे 
ना रोक मुझे ना टोक मुझे 
झूम रहा ज़िंदगी मेरी इस पल की मीठी धून मे 
कल कि ना परवाह मुझे ना फ़िक्र मुझे I 
आज का ये सुन्हेरा पल जीलेने दे मुझे 
ना रोक मुझे ना टोक मुझे I


Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Tuesday, March 31, 2015

आप को तो छुपाना भी नहीं आता

मुस्कुराहट के पीछे छुपी हुई वो दर्द और आँखों के पीछे छुपी हुई वो अनकही दास्तां सॉफ नज़र आता है आप को तो छुपाना भी नहीं आता I

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, March 28, 2015

ज़िंदगी का मतलब "हसी" से है

ज़िंदगी का मतलब "हसी" से है...
वो हसी चाहे किसीकी भी हो
कोई हस्ता है... मतलब कोई दूसरा भी हस रहा है...
और क्या चाहिये ज़िंदगी से...
कोई भी खुस है... तो मे भी खुस हूं।

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

तुझ से तेरा गम बांटना चाहता हूँ

तुझ से तेरा गम बांटना चाहता हूँ
तेरी आंसु से आंसु मिलाना चाहता हूँ
संग हूँ मैं, ये केहना चाहता हूँ
एक बार यकीन कर मेरा बस यही केहना चाहता हूँ 

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, December 20, 2014

अपनी लहू कर नहीं सकते अदा


जब जीवन उसने दिया
उसे लेने वाले हम हे कौन
नन्हीं कलियाँ तो खुसियां बिखेरते हैं
उन्हे मरोडनेवाले हम है कौन

क़त्ल क्यों कर आया उन मासूमों की
जिनकी ना तो कुच्छ खता थी
ना हेबानियत से कुच्छ नाता
पर चढ़ गये बलि बिना कीसी कारण के
ये नाइंसाफी देख रहा है वो खुदा
भुला हुआ इंसान को इंसानियत सिखादे हे मालिक
अब हर दिन दूसरों की खुसी केलिये अपनी लहू कर नहीं सकते अदा । 

महाप्रसाद मिश्रा 

Sunday, November 2, 2014

जीत से सीखा, हार से सीखा

जीत से सीखा, हार से सीखा
गालियों से सीखा, और तालियों से भी सिखा
की सर झुका हुआ अछा लगता है
अपनो का प्यार, सचाई ऑर गुरुओं के सामने
क्यों के इनमे भगबन बसे हैं।

 Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, November 1, 2014

कुच्छ वो बातें मेरे कलम से ...

अकेला था बैठा
दिल से आवाज आया
आज तक हसा तो कोई ना देख पाया
आज तक हसा तो कोई ना देख पाया
हुआ खामोश आज तो सब की नज़र मैं आया
 
जब हो रही बारिश तभी चुपके से आसूं बाहर आया
इस्से मैं किस्मत कहूँ या मेरी तक़दीर
इससे मैं किस्मत कहूँ या मेरी तक़दीर 
जब पेहना इंसानियत का चस्मा 
तभी दुनिया काला ही नज़र आया...
 
पर फिर भी दिल ने ना मानी मेरी बात
ओर मुझे समझाने को आया 
की भाई मेरे, ये असूल है इस युग का 
जो दूसरो के लिये सोचा, वो खुद केलिये कुच्छ ना करपाया 
सायद आया है तू इसी केलिए, तो ना देख दुनिया काला है या सफेद
कर हिम्मत, आगे बढ, किसीसे ना कर प्रभेद
जो उपर बैठा है वो देखा रहा है
तेरे बारे मैं भी कुच्छ सोच रहा है...
सोचना उससे और करना तुझे है...
असफल हो जाएगा ये जीवन तेरा
अगर तूने उसकी आशीर्वाद को ठुकराया
अफ़सोश रहेगा की इंसान होते हुए भी तू अगर कुच्छ ना करपाया...
 
भगबान पे भरोशा रखिये (Believe in God)

महाप्रसाद मिश्रा

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