Thursday, April 19, 2018

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Friday, March 16, 2018

कुछ वो बातें मेरी कलम से


नाहीं जान हे नाहीं पहचान
फिर क्यों खोया हे मन मेरा तेरे खयालो में
बेचारा दिल मेरा इस से हे अनजान
लगता हे लूट लिया मेरे दिलको
तू हे इक मासूम परी नादान I


महाप्रसाद मिश्रा
http://mahaprasadmishra.blogspot.in/

#LifeIsBeautiful  

Sunday, August 28, 2016

कुच्छ वो बातें मेरी कलम से ...

समय के अनुसार सब बदलता हे आप की चाह भी और आप की राह भी I

Thursday, March 24, 2016

कुच्छ वो बातें मेरी कलम से ...

नाहीं भांग था
और नाहीं रंग
फिर भी थी जसन
वो यारों के संग
झूम लिया मिलके सबने आज
जैसे लौट आयी हो वो बचपन की उमंग

Happy Holi !!!

Mahaprasad


Tuesday, January 26, 2016

अँधेरा कभी कभी अच्छा लगता हे ...

अँधेरा कभी कभी अच्छा लगता हे

ये अपने आपको ढूंढने मे मदद करता हे

अँधेरे मे बैठे हुए लौट जाता हूँ कुछ वो पुराने खयालो मे

जिसे भूलाना नामुमकिन हे

दोबारा वो पल जीने का अरमान तो हे

मगर पता हे, ये अँधेरे से निकल ने के बाद ये नामुमकिन जैसा हे

इसीलिए कभी कभी अँधेरा अच्छा लगता हे I

महाप्रसाद मिश्र

Sunday, May 3, 2015

आज का ये सुन्हेरा पल जी लेने दे मुझे

आज का ये सुन्हेरा पल जी लेने दे मुझे 
ना रोक मुझे ना टोक मुझे 
झूम रहा ज़िंदगी मेरी इस पल की मीठी धून मे 
कल कि ना परवाह मुझे ना फ़िक्र मुझे I 
आज का ये सुन्हेरा पल जीलेने दे मुझे 
ना रोक मुझे ना टोक मुझे I


Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Tuesday, March 31, 2015

आप को तो छुपाना भी नहीं आता

मुस्कुराहट के पीछे छुपी हुई वो दर्द और आँखों के पीछे छुपी हुई वो अनकही दास्तां सॉफ नज़र आता है आप को तो छुपाना भी नहीं आता I

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, March 28, 2015

ज़िंदगी का मतलब "हसी" से है

ज़िंदगी का मतलब "हसी" से है...
वो हसी चाहे किसीकी भी हो
कोई हस्ता है... मतलब कोई दूसरा भी हस रहा है...
और क्या चाहिये ज़िंदगी से...
कोई भी खुस है... तो मे भी खुस हूं।

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

तुझ से तेरा गम बांटना चाहता हूँ

तुझ से तेरा गम बांटना चाहता हूँ
तेरी आंसु से आंसु मिलाना चाहता हूँ
संग हूँ मैं, ये केहना चाहता हूँ
एक बार यकीन कर मेरा बस यही केहना चाहता हूँ 

Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, December 20, 2014

अपनी लहू कर नहीं सकते अदा


जब जीवन उसने दिया
उसे लेने वाले हम हे कौन
नन्हीं कलियाँ तो खुसियां बिखेरते हैं
उन्हे मरोडनेवाले हम है कौन

क़त्ल क्यों कर आया उन मासूमों की
जिनकी ना तो कुच्छ खता थी
ना हेबानियत से कुच्छ नाता
पर चढ़ गये बलि बिना कीसी कारण के
ये नाइंसाफी देख रहा है वो खुदा
भुला हुआ इंसान को इंसानियत सिखादे हे मालिक
अब हर दिन दूसरों की खुसी केलिये अपनी लहू कर नहीं सकते अदा । 

महाप्रसाद मिश्रा 

Sunday, November 2, 2014

जीत से सीखा, हार से सीखा

जीत से सीखा, हार से सीखा
गालियों से सीखा, और तालियों से भी सिखा
की सर झुका हुआ अछा लगता है
अपनो का प्यार, सचाई ऑर गुरुओं के सामने
क्यों के इनमे भगबन बसे हैं।

 Mahaprasad Mishra
#LifeIsBeautiful

Saturday, November 1, 2014

कुच्छ वो बातें मेरे कलम से ...

अकेला था बैठा
दिल से आवाज आया
आज तक हसा तो कोई ना देख पाया
आज तक हसा तो कोई ना देख पाया
हुआ खामोश आज तो सब की नज़र मैं आया।
 
जब हो रही बारिश तभी चुपके से आसूं बाहर आया
इस्से मैं किस्मत कहूँ या मेरी तक़दीर
इससे मैं किस्मत कहूँ या मेरी तक़दीर 
जब पेहना इंसानियत का चस्मा 
तभी दुनिया काला ही नज़र आया...
 
पर फिर भी दिल ने ना मानी मेरी बात
ओर मुझे समझाने को आया 
की भाई मेरे, ये असूल है इस युग का 
जो दूसरो के लिये सोचा, वो खुद केलिये कुच्छ ना करपाया 
सायद आया है तू इसी केलिए, तो ना देख दुनिया काला है या सफेद
कर हिम्मत, आगे बढ, किसीसे ना कर प्रभेद
जो उपर बैठा है वो देखा रहा है
तेरे बारे मैं भी कुच्छ सोच रहा है...
सोचना उससे और करना तुझे है...
असफल हो जाएगा ये जीवन तेरा
अगर तूने उसकी आशीर्वाद को ठुकराया
अफ़सोश रहेगा की इंसान होते हुए भी तू अगर कुच्छ ना करपाया...
 
भगबान पे भरोशा रखिये (Believe in God)

महाप्रसाद मिश्रा

Monday, October 27, 2014

छोड़ आये थे जो वो गलियाँ...

छोड़ आये थे जो वो गलियाँ
मूड कर देख रहे हैं आज जिसे
गलियाँ है तो वही ...
पर लोग है नये
ये तो समय का वो चक्र है...
जिस मे जाने नजाने कितने आये ओर कितने गये।

अब, वो पुराने लोगों से मिलने की आस है
मगर सोच रहा अब समय किस के पास है
वो कीमती वक़्त जो उनके साथ गुजर गया
वो तो अब आ नहीं सकता ...
लेकिन जब मिलता हूँ दोस्तों से या करता हूँ बातें
अब सिर्फ वही पल खुसी है ओर वही पल खास है !!!

महाप्रसाद मिश्रा
(जीवन खूबसूरत है।)  

Sunday, September 28, 2014

सीने मैं क़ैद है... वो दर्द इस तरह...

सीने मैं क़ैद है वो दर्द इस तरह... जैसे चारो तरफ सीशे मैं क़ैद हे एक छबी जिस तरह !!!

महप्रसाद मिश्रा

Tuesday, September 9, 2014

क्या पता क्या हुआ मुझे (इक खत उसके नाम)

क्या पता क्या हुआ मुझे
अच्छा भला था पागल हुआ मैं
तुझे देखा तो एक खूबसूरत चाहत खिला मन मैं
क्या पता क्या हुआ मुझे
अच्छा भला था पागल हुआ मैं।

दिन तो गया ही गया 
रातों को भी अब चैन नहीं
अकेले बैठे हुये तेरी याद मैं खोया मैं
आंखे है खूली फिर भी सोया हूँ मैं
क्या पता क्या हुआ मुझे
अच्छा भला था पागल हुआ मैं।

आज तक कभी ऐसा हुआ न था
जैसे इक पल मे सारा जहां भूला मैं
कभी ना गीत सुनने वाला 
आज गज़ल सुनने लगा मैं
क्या पता क्या हुआ मुझे
अच्छा भला था पागल हुआ मैं।

तेरे आने से जैसे चारो तरफ मेहक सा गया
तू गुजरी वो दूर से, लेकिन दिल मेरा इधर झूम सा गया
हाये, आँख झुकाके वो चलना तेरा
जब देखा, ये दिल मेरा प्यार का नया गीत लिखता गया...
लगता है जैसे इक पल मैं बदल गयी ज़िंदगी,
और बदल गया मैं...
क्या पता क्या हुआ मुझे
अच्छा भला था पागल हुआ मैं।

एक दिन देखा नहीं तुझे तो दिल जैसे तड़प ने लगा
मन बेकरार ओर आँखें बेचैन होने लगा
सोचा आज मिलेगी तो दिल की बातें बयान करूंगा मैं
आई ही नहीं तू, इसीलिये ये खत लिख रहा हूँ मै
समझ ही जाना,
इक खत वापस आया तो ज़िंदगी संवर जायेगी मेरी
और “ हम ” बनजायेगा ये अकेला ओर तन्हा “ मैं ”
अगर जवाब आया नहीं तो सोच लूंगा
क्या पता कुच्छ हुआ था मुझे
अच्छा भला था कभी पागल हुआ था मैं
तेरी खुशियों के लिये दुआ करूंगा
सारी यादें लिये तेरी ज़िंदगी से चला जाऊँगा मैं !!!



महाप्रसाद मिश्रा

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